एंजेल चकमा पर हुए बर्बर हमले की कड़े शब्दों में निंदा
संदीप गोयल/एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून, 28 दिसंबर। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया उत्तराखंड, देहरादून में पढ़ रहे त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा पर हुए नस्लवादी और बर्बर हमले की कड़े शब्दों में निंदा करता है। इस हमले से संपूर्ण स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया स्तब्ध एवं व्यथित है। यह हमला न केवल एक छात्र की जान पर हमला है, बल्कि यह हमारे समाज में बढ़ती नस्लवादी, क्षेत्रवादी, मानसिकता, असहिष्णुता और छात्र-विरोधी माहौल को भी उजागर करता है। एंजेल चकमा पर सरेआम गाली-गलौज, नस्लीय अपमान और जानलेवा हमला यह साबित करता है कि उत्तराखंड राज्य में भी बाहरी और पूर्वोत्तर राज्यों से आए छात्रों की सुरक्षा गंभीर खतरे में है। यह अत्यंत शर्मनाक है कि शिक्षा के लिए आए छात्रों को अपनी पहचान के कारण हिंसा का शिकार होना पड़ रहा है। इस मसले पर प्रदेश अध्यक्ष नितिन मलेठा ने कहा कि उत्तराखंड राज्य मजहबी, क्षेत्रवादी और नस्लवादी पहचान की राजनीती की चपेट में है। इस प्रकार की पहचान की राजनीती मानवीय मूल्यों को गौण कर रही है और पहचान की हिंसक संकीर्णता में छात्रों- युवाओं को धकेल रही है। एस एफ आई के राज्य सचिव शैलेन्द्र परमार ने कहा कि उत्तर भारत में छोटी आंखों वाले व्यक्तियों को कुछ प्रतीकात्मक नामों जैसे की चिंकी इत्यादि से बुलाया जाता है जो कि नस्लीय भेदभाव का प्रतीक है। इस प्रकार की टिप्पणियों का प्रचलन नहीं होना चाहिए। एस.एफ.आई. जल्द ही इस समस्या पर एक विरोध दर्ज करते हुए एक सेमिनार करेगी। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया उत्तराखंड राज्य कमेटी यह मांग करता है कि इस मामले में शामिल सभी दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। इस हमले को नस्लवादी हिंसा मानते हुए विशेष धाराओं में मुकदमा चलाया जाए। उत्तराखंड में पढ़ रहे पूर्वोत्तर और अन्य बाहरी राज्यों के छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रावासों, किराए के इलाकों और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करे। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया उत्तराखंड यह स्पष्ट करता है कि हम इस अन्याय के खिलाफ छात्रों को संगठित कर संघर्ष तेज करेंगे।
