एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

देहरादून, 14 जून। हैदराबाद के डुंडीगल स्थित एयर फ़ोर्स एकेडमी से ग्रेजुएशन के बाद, कुल 231 फ़्लाइट कैडेट्स (194 पुरुष और 37 महिलाएँ) – जिनमें नेशनल डिफेंस एकेडमी की महिलाओं का पहला बैच भी शामिल था – को भारतीय वायु सेना में अधिकारी के तौर पर कमीशन किया गया। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 217वें कोर्स की कंबाइंड ग्रेजुएशन परेड का निरीक्षण किया और पास होने वाले कैडेट्स को ‘प्रेसिडेंट कमीशन’ प्रदान किया। इसके साथ ही IAF की फ़्लाइंग और ग्राउंड ड्यूटी शाखाओं के लिए कैडेट्स की प्री-कमीशनिंग ट्रेनिंग पूरी हुई। इस मौके पर भारतीय नौसेना के नौ (09) अधिकारियों, भारतीय तटरक्षक बल के 03 अधिकारियों और सोशलिस्ट रिपब्लिक ऑफ़ वियतनाम के 02 अधिकारियों को ‘विंग्स’ प्रदान किए गए। नेविगेशन ट्रेनिंग पूरी करने पर 03 अधिकारियों को ‘ब्रेवेट्स’ दिए गए। पास होने वाले कैडेट्स को बधाई देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि वे एक ऐसी सेवा में शामिल हो रहे हैं जिसने हमेशा देश के लिए ढाल और तलवार दोनों का काम किया है। उन्होंने कहा, “IAF ने श्रीनगर एयरलिफ़्ट के ज़रिए कश्मीर में 1947-48 की लड़ाई का रुख़ बदल दिया और 1971 की लड़ाई के दौरान निर्णायक हवाई हमलों से सिर्फ़ 13 दिनों में इतिहास रच दिया। 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके अदम्य साहस और बेमिसाल वीरता का प्रदर्शन हुआ, जब उन्होंने सटीकता के साथ आतंकवादियों के ठिकानों को नष्ट कर दिया। यह ऑपरेशन न केवल हमारे स्वदेशी प्लेटफ़ॉर्म की वजह से, बल्कि IAF के प्रशिक्षित, साहसी और अनुशासित अधिकारियों की वजह से भी सफलतापूर्वक पूरा हुआ। मुझे भरोसा है कि भविष्य के ऑपरेशन्स में भी यह अहम भूमिका निभाता रहेगा।” श्री राजनाथ सिंह ने अधिकारियों से कहा कि वे उभरती चुनौतियों के प्रति हमेशा सतर्क रहें और हालात के हिसाब से अपनी प्रतिक्रिया में बदलाव करते रहें। “पारंपरिक युद्ध में दो मुख्य पहलू होते हैं: सैनिक और उनके हथियार। लेकिन आधुनिक युद्ध में न तो दुश्मन आसानी से दिखता है और न ही इस्तेमाल हो रहे हथियार। रडार, सैटेलाइट, ड्रोन, सेंसर और रोबोटिक्स जैसे सिस्टम की वजह से दुश्मन या उनकी मशीनरी का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे हालात भी होते हैं जब दुश्मन के ट्रैफिक सिस्टम और यहां तक कि CCTV नेटवर्क को भी हैक करके कंट्रोल किया जा सकता है। आपकी ट्रेनिंग और एक्सरसाइज़ ने आपको अनिश्चितताओं और अचानक आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए अच्छी तरह तैयार किया है। आपको हमेशा सतर्क रहना चाहिए,” उन्होंने कहा। रक्षा मंत्री ने पास आउट होने वाले कैडेट्स से कहा कि वे भविष्य के युद्ध सिस्टम और रणनीतियों को समझें, उनके हिसाब से खुद को ढालें, उन्हें अपनाएं और ज़रूरत पड़ने पर उनमें बदलाव भी करें। उन्होंने हर मोर्चे पर नई सोच लाने, उसे लागू करने और निर्णायक बढ़त हासिल करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। “हर संघर्ष सीखने का एक मौका होता है। आपको कड़ी मेहनत के साथ-साथ स्मार्ट वर्क और समझदारी का भी इस्तेमाल करना चाहिए। आज के दौर में, स्मार्ट देश टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी खास जगह बना रहे हैं। पहले माना जाता था कि बड़ी ताकतों का हर मोर्चे पर दबदबा होता है, लेकिन आज छोटी ताकतें भी छोटे लेकिन खतरनाक हथियारों और नई रणनीतियों का इस्तेमाल करके बड़े प्लेटफॉर्म्स को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं,” उन्होंने आगे कहा। श्री राजनाथ सिंह ने अधिकारियों से कहा कि वे सीखना और ट्रेनिंग लेना कभी बंद न करें। उन्होंने ज़ोर दिया कि उनके कंधों पर लगे ‘विंग्स’ (पंख) सिर्फ़ एक बैज नहीं हैं, बल्कि हर भारतीय के भरोसे का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा, “आप जो ज़िम्मेदारी संभालने जा रहे हैं, वह इतनी जटिल है कि आपको अक्सर मिनटों में नहीं, बल्कि सेकंडों या उससे भी कम समय में फ़ैसले लेने होंगे। आपको हमेशा प्रोफ़ेशनलिज़्म और व्यवहार के ऐसे ऊँचे मानक बनाए रखने चाहिए जो दूसरों को प्रेरित करें।” महिला अधिकारियों को विशेष बधाई देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘नारी शक्ति’ की बढ़ती मौजूदगी IAF को और मज़बूत और संतुलित बनाएगी। उन्होंने कहा, “यह हमारी समावेशी फ़ोर्स की ताकत को दिखाता है।” उन्होंने पास आउट होने वाले वियतनामी कैडेट्स को भी उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएँ दीं और भरोसा जताया कि उनकी ट्रेनिंग दोनों देशों के बीच दोस्ती को और मज़बूत करेगी। श्री राजनाथ सिंह ने देश और विदेश में कई रेस्क्यू मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करने में IAF की अहम भूमिका की तारीफ़ की। यह भारतीय संस्कृति और पूरी मानवता की मदद करने की भावना को दर्शाता है, जो राष्ट्रीयता, भाषा या सीमाओं से परे है। अपने भाषण के आखिर में उन्होंने कहा, “अक्सर कहा जाता है कि ‘आसमान ही सीमा है’। यह बात निश्चित रूप से IAF के लिए सही है, लेकिन आपको ‘आसमान हमारा घर है’ के विज़न के साथ आगे बढ़ना चाहिए। यही विज़न हमें 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने में मदद करेगा।” परेड ने रिव्यूइंग ऑफ़िसर को ‘जनरल सैल्यूट’ दिया और उसके बाद शानदार मार्च पास्ट हुआ। परेड के दौरान चीफ़ ऑफ़ द एयर स्टाफ़ एयर चीफ़ मार्शल एपी सिंह की अगुवाई में एक बेहतरीन और तालमेल भरा फ़्लाईपास्ट भी हुआ। फ़्लाईपास्ट में चार तरह के ट्रेनर एयरक्राफ़्ट – पिलाटस PC-7 Mk II, हॉक, किरण और चेतक – दिखाए गए। परेड का समापन नए नियुक्त अधिकारियों के दो कॉलम में मार्च करते हुए हुआ, जिसमें जोश भरी मार्चिंग धुनों के बीच उनके ठीक जूनियर अधिकारियों ने उन्हें पहला सैल्यूट दिया। अलग-अलग ट्रेनिंग क्षेत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए रक्षा मंत्री ने पास आउट होने वाले अधिकारियों को पुरस्कार दिए। फ़्लाइंग ऑफ़िसर आशीष कुमार यादव को पायलट कोर्स में ओवरऑल मेरिट में पहला स्थान पाने के लिए प्रतिष्ठित ‘प्रेसिडेंट्स प्लाक’ और ‘नवानगर स्वॉर्ड ऑफ़ ऑनर’ से सम्मानित किया गया। नेविगेशन स्ट्रीम में ओवरऑल मेरिट लिस्ट में पहला स्थान हासिल करने के लिए फ्लाइंग ऑफिसर एकता गुप्ता को ‘प्रेसिडेंट प्लेक’ से सम्मानित किया गया। ग्राउंड ड्यूटी ब्रांच में ओवरऑल मेरिट लिस्ट में पहला स्थान पाने के लिए फ्लाइंग ऑफिसर दिव्यांशी सिंह को ‘प्रेसिडेंट प्लेक’ दिया गया। इस कार्यक्रम में ‘आकाश गंगा’ और महिला एयर वॉरियर ड्रिल टीम ‘शक्ति’ का प्रदर्शन भी शामिल था, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। परेड के शानदार समापन में Su-30 MKI, सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम और सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम का शानदार एरोबैटिक्स प्रदर्शन भी शामिल था। इस मौके पर ट्रेनिंग कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल एस श्रीनिवास, AFA के कमांडेंट एयर मार्शल राहुल भसीन और IAF के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। पास-आउट होने वाले अधिकारियों के लिए कमीशनिंग समारोह बहुत खास होता है, क्योंकि उन्हें उनके गर्व से भरे माता-पिता और परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में राष्ट्रपति का कमीशन सौंपा जाता है। यह यादगार मौका एक ऐसे शानदार सफ़र की शुरुआत है जो सम्मान, गर्व और देश की सेवा के प्रति अटूट संकल्प से भरा होता है। उन्हें शपथ दिलाई जाती है, जिसमें वे देश की संप्रभुता और सम्मान की रक्षा करने का संकल्प लेते हैं।

 

 

 

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