मानसून की पहली वर्षा के साथ प्रकृति संरक्षण और राष्ट्रधर्म का संकल्प
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में मानसून की प्रथम वर्षा के पावन अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने ऋषिकुमारों के साथ पौधारोपण कर हरित भारत, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण का प्रेरणादायी संदेश दिया। पूज्य स्वामी ने कहा कि
“प्रकृति का संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रधर्म का सर्वोच्च स्वरूप है। जल, जंगल, जमीन और जैव विविधता की रक्षा ही भारत की संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा है।” उन्होंने सभी से आह्वान किया कि केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उन्हें परिवार के सदस्य की तरह अपनाकर उनका संरक्षण करना भी हमारा दायित्व है। प्रत्येक परिवार, प्रत्येक विद्यालय, प्रत्येक आश्रम और प्रत्येक संस्था प्रतिवर्ष पौधारोपण के साथ उसके संरक्षण का भी संकल्प ले। यही सच्चा राष्ट्रप्रेम है, यही सनातन संस्कृति का संदेश है। एक पौधा केवल वृक्ष नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन, स्वच्छ वायु, जल और आशा का संकल्प है। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर पूज्य स्वामी जी ने सभी चिकित्सकों को हार्दिक शुभकामनाएँ अर्पित करते हुए कहा कि “मानव सेवा ही माधव सेवा है। चिकित्सक केवल रोगों का उपचार नहीं करते, बल्कि मानवता की रक्षा और जीवन में आशा का संचार करते हैं।” आज की दिव्य परमार्थ गंगा आरती सभी चिकित्सकों के स्वस्थ, सुखी एवं दीर्घायु जीवन के लिए समर्पित की गई। इस मानसून हम सभी कम से कम एक पौधे का रोपण ही नहीं, बल्कि उसके संरक्षण का भी संकल्प लें। यही प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, राष्ट्र के प्रति हमारी जिम्मेदारी और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा अमूल्य उपहार है।
