संदीप गोयल/एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून, 28 जुलाई 2026। दून चिकित्सालय की शुरुआत वर्ष 1854 में एक डिस्पेंसरी के रूप में हुई थी। औषधालय में 1860 में रोगियों का प्रवेश शुरू हुआ। उस समय देहरादून की जनसंख्या मात्र 19000 थी। तथा वर्ष 1890 में इसका प्रथम विस्तारीकरण किया गया। बाद में वर्ष 1910 में एक ऑपरेशन थियेटर का निर्माण किया गया था और 1910 में शल्यक्रियाएं शुरू हुईं। 27 अप्रैल 1926 को चिकित्सालय के उच्चीकरण के लिये प्रथम सिविलयन सर्जन ले. कर्नल सी.एच. बार्बर थे, चिकित्सा अधीक्षक जी. फ्लोवर्स आईसीएस द्वारा तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष शमशेर बहादुर सिंह से इस औषधालय को एक बड़े अस्पताल के रूप में विकसित करने की योजना बनाने के लिए मुलाकात की। जिसके उपरांत उन्होंने एक सार्वजनिक बैठक की, जिसमे नागरिकों द्वारा 1,10,000 रुपये का अंशदान चिकित्सालय निर्माण हेतु किया गया। 24 जनवरी 1932 को अस्पताल भवन परियोजना को मंजूरी दी गई और लोक निर्माण विभाग को अस्पताल भवन के निर्माण का कार्य सौंपा गया। उस समय इसमें कुल 75 बिस्तर थे, जिनमें 57 सामान्य और 18 निजी बिस्तर शामिल थे। आंग्ल वास्तुकला की आर्ट डेको डिजाइन पर आधारित चिकित्सालय का निर्माण 24 जनवरी 1932 को लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रारंभ किया गया। इस चिकित्सालय के निर्माण में 3 लाख 50 हजार रुपये व्यय किया गया। विश्व बैंक सहायतित उत्तरांचल हैल्थ डेवलेपमेंट परियोजना द्वारा चिकित्सालय के विस्तारीकरण एव सुदृढ़ीकरण का कार्य अगस्त 2003 को प्रारम्भ हुआ। 312 रोगी शय्याओ से युक्त दून चिकित्सालय का आधुनिकीकरण एव विस्तारीकरण का कार्य अगस्त 2005 को पूर्ण हुआ। इस चिकित्सालय के निर्माण पर लगभग 550 लाख रुपये व्यय किये गये। उस समय मुख्यमंत्री एन.डी. तिवारी द्वारा स्वास्थ्य मंत्री तिलक राज बेहड़ की उपस्थिति मे दून चिकित्सालय का लोर्कापण 8 सितम्बर 2005 को किया गया था। दून चिकित्सालय के तृतीय तल के निर्माण कार्य का शिलान्यास स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर रमेश पोखरियाल निशक तथा कृषि मंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता मे 13 नवंबर 2008 को किया गया।
23 दिसंबर 2015 को, एक सरकारी आदेश द्वारा दून अस्पताल और महिला अस्पताल को उत्तराखंड के चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन स्थानांतरित और उन्नत किया गया। उत्तराखंड सरकार इस अस्पताल को देश के इस क्षेत्र के प्रमुख चिकित्सा स्वास्थ्य केंद्रों में से एक बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। बिस्तरों की संख्या बढ़ाकर लगभग 350 कर दी गई है और इसे न्यूरो सर्जरी और प्लास्टिक सर्जरी जैसे विभिन्न सुपर स्पेशलिटी विभागों के साथ 750 बिस्तरों वाले अस्पताल में अपग्रेड किया जा रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों से शिक्षकों की नियुक्ति के साथ, चिकित्सा सेवाओं को लगातार उन्नत किया जा रहा है। नए उपकरण और बुनियादी ढांचा तैयार करने, खरीदने और स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। 23 दिसंबर 2015 को इसे उत्तराखंड सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन कर दिया गया। 2016 इसे पूर्ण रूप से सरकारी दून मेडिकल कॉलेज में बदल दिया गया, जहां बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड सर्जरी (एमबीबीएस) की पढ़ाई और आधुनिक इलाज की शुरुआत हुई।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *