एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा कूटनीति पर ‘रक्षा’ नामक दस्तावेज का विमोचन किया। यह व्यापक ढांचा अगले 10 वर्षों में वैश्विक रक्षा साझेदारियों के लिए भारत के रणनीतिक रोडमैप और दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। यह दस्तावेज़ भारत की रणनीतिक प्रतिबद्धता में एक बदलाव को दर्शाता है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों को सक्रिय वैश्विक सहयोग के साथ जोड़ा गया है, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता और पारस्परिक विकास को बढ़ावा मिलता है। रणनीतिक खाके में जिन प्रमुख स्तंभों पर प्रकाश डाला गया है, वे इस प्रकार हैं:

रणनीतिक साझेदारी : द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना

क्षमता निर्माण : संयुक्त सैन्य अभ्यासों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और मित्र देशों के साथ सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना।

स्वदेशी निर्यात : भारत में निर्मित रक्षा प्लेटफार्मों को बढ़ावा देकर देश को एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना।

समुद्री सुरक्षा : हिंद महासागर क्षेत्र में नेट सुरक्षा प्रदाता और प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करना

रक्षा कूटनीति भारत की विदेश नीति का एक मुख्य स्तंभ है, इसलिए यह दस्तावेज़ अगले दशक के लिए एक स्पष्ट और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि भारत बदलते वैश्विक परिदृश्य में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बना रहे। सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ; रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह; रक्षा उत्पादन सचिव श्री संजीव कुमार; विदेश मंत्रालय के पूर्वी सचिव श्री रुद्रेंद्र टंडन; वायु सेना उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित; नौसेना उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर; चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष के एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख एयर मार्शल तेजिंदर सिंह और रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।

 

 

 

 

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