महंगाई पर अंकुश लगाने में विफल सरकार
एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून। उत्तराखंड में देहरादून महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी ने राज्य और देश में बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र सरकार को आढ़े हाथ लिया है। उन्होंने कहा कि अब तो स्थिति सामान्य है। इसके बावजूद जनता को महंगाई की मार क्यों पड़ रही है। पेट्रोल और डीजल के दामों बढ़ाने के लिए सरकार ने जितनी जल्दबाजी दिखाई, अब दाम को घटाने में क्यों उदासीन बनी हुई है। महंगाई से लोग त्रस्त हैं। यदि जल्द बढ़ती महंगाई पर अंकुश नहीं लगाया गया तो सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज किया जाएगा।
एक बयान में डॉ. गोगी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटने के बाद भी भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम क्यों नहीं घटाए जा रहे हैं। ये सवाव अब जनता पूछ रही है। अमेरिका और इसराइल के ईरान पर हमले के दौरान क्रूड आयल के दाम बढ़ गए। इसे देश की जनता ने भी समझा। तब प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की कि वाहनों को कम चलाएं। इसे भी जनता ने मान लिया। हालांकि, दिखावे के लिए बीजेपी नेताओं ने एक दो दिन साइकिल या बस ये यात्रा की फिर पुराने ढर्रे पर उतर गए और वाहनों के काफिले से नेताओं का मोह भंग नहीं हो पाया है।
डॉक्टर गोगी ने कहा कि अब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ गई है। फिर भी महंगाई को रोकने के लिए सरकार की कोई नीति नहीं है। ईरान से सस्ता तेल सरकार क्यों नहीं ले रही है। इसके लिए किसका दबाव है। रूस से तेल खरीदना और ना खरीदना अमेरिका तय कर रहा है। क्रूड आयल की कीमत युद्ध के दौरान बढ़ गई थी। अब तो घट गई है। फिर भी जनता को राहत क्यों नहीं दी जा रही है। सच्चाई ये भी है कि पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने का असर ट्रांसपोर्ट महंगा होने के रूप में होता है। ऐसे में हर वस्तु के दाम में बढ़ोत्तरी होती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था। यह कीमत युद्ध से पहले के स्तर 72 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। ऐसे में देशवासियों को सौ रूपये प्रति लीटर के हिसाब में पेट्रोल मिल रहा है। अब जब ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत गिरकर 70.78 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो पिछले दिन से 1.11प्रतिशत कम है। पिछले एक महीने में ब्रेंट की कीमत में 27.64 प्रतिशत की गिरावट आई है। फिर भी देशवासियों को महंगा पेट्रोल और डीजल क्यों बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के 2004-2014 के कार्यकाल के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की औसत कीमत $70 से लेकर 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच रही, जो 2008 में रिकॉर्ड 147 प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। इसके बावजूद, आम जनता को राहत देने के लिए सरकार द्वारा भारी सब्सिडी दी जाती थी। इसके कारण 2014 में सरकार जाने के समय पेट्रोल का दाम लगभग 71 से 72 रुपये प्रति लीटर और डीजल का दाम करीब 55 रुपये प्रति लीटर था। उन्होंने कहा कि साफ है कि केंद्र की बीजेपी सरकार कुछ उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए तेल की कीमतों को कम नहीं कर रही है। इसके महंगाई बढ़ रही है। रसोई के हर सामान की कीमतों में चार से 11 फीसद का इजाफा हो गया है। कांग्रेस कार्यकर्ता इस खेल को समझ रहे हैं। सरकार की इस जनविरोधी नीतियों के खिलाफ लगातार आंदोलन किया जाएगा। साथ ही जनता को भी इस खेल के खिलाफ जागरूक किया जाएगा।
