महापरिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अवधेश पन्त ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
संदीप गोयल/ एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून। उत्तराखंड में एमबीबीएस प्रवेश के लिए स्वतंत्रता सेनानी कोटे के अंतर्गत जारी किए गए प्रमाण-पत्रों की जांच में सामने आई कथित अनियमितताओं को लेकर अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं शहीद परिवार कल्याण महा परिषद (रजि.) ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अवधेश पन्त ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की है। श्री पन्त ने कहा कि समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार एमबीबीएस सीटों के लिए जारी प्रमाण-पत्रों की जांच के दौरान कई मामलों में गंभीर सवाल सामने आए हैं। रिपोर्ट में सात अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्रों पर संदेह के बाद जांच किए जाने तथा तीन मामलों में अधूरे दस्तावेजों पर प्रमाण-पत्र जारी होने की बात सामने आई है। एक मामले में लेखपाल द्वारा फील्ड विजिट किए बिना रिपोर्ट लगाए जाने तथा एक अन्य मामले में ऐसे प्रमाण-पत्र नंबर का उल्लेख किए जाने की बात कही गई है, जो जारी ही नहीं हुआ था।
उन्होंने कहा कि यह केवल प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया में हुई सामान्य चूक का विषय नहीं है, बल्कि स्वतंत्रता सेनानी कोटे जैसे संवेदनशील एवं सम्मान से जुड़े प्रावधान की विश्वसनीयता का प्रश्न है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह पता लगाया जाना आवश्यक है कि प्रमाण-पत्र जारी करने से पहले निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया और इसके लिए कौन-कौन अधिकारी एवं कर्मचारी जिम्मेदार हैं। “सिर्फ लेखपाल स्तर की गलती मानकर मामला समाप्त न किया जाए” अवधेश पन्त ने कहा कि प्रशासन द्वारा यदि केवल निचले स्तर की त्रुटि मानकर कार्रवाई की जाती है तो यह पर्याप्त नहीं होगा। प्रमाण-पत्र जारी होने की पूरी प्रक्रिया में संबंधित सभी स्तरों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए। यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि अधूरे दस्तावेजों और कथित रूप से बिना उचित सत्यापन के रिपोर्ट के आधार पर प्रमाण-पत्र किसके अनुमोदन से जारी हुए। उन्होंने मांग की कि प्रकरण की जांच किसी सक्षम वरिष्ठ अधिकारी अथवा स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच समिति से कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक संदिग्ध प्रमाण-पत्रों और उनसे संबंधित प्रवेश प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाए। श्री पन्त ने कहा कि शासन द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों एवं उनके परिवारों के सम्मान, समस्याओं के समयबद्ध निस्तारण तथा उनके कार्यों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखने के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद अनेक अवसरों पर स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को अधिकारियों एवं कर्मचारियों के स्तर पर असम्मानजनक व्यवहार और अनावश्यक कार्यालयी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के पूर्वजों ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन और भविष्य दांव पर लगाया, उनके सम्मान से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता। शासनादेशों के बावजूद यदि स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के कार्य लंबित रखे जाते हैं अथवा उनके साथ असम्मानजनक व्यवहार होता है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। अवधेश पन्त ने मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से मांग की है कि एमबीबीएस स्वतंत्रता सेनानी कोटे के प्रमाण-पत्र प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए तथा स्वतंत्रता सेनानी परिवारों से जुड़े प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं।
